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व्यासी जल विद्युत परियोजना: Uttarakhand ka Lohari gaon jal mein dooba: उत्तराखंड का लोहारी गांव जल में डूबा

व्यासी जल विद्युत परियोजना: Uttarakhand ka Lohari gaon jal mein dooba: उत्तराखंड का लोहारी गांव जल में डूबा


देवेश सागर, देहरादून: ‘उत्तराखंड का पानी और उत्तराखंड की जवानी पहाड़ों के काम नहीं आती’, से यह कहावत उत्तराखंड में हमेशा चलती रही है। पहाड़ों की खूबसूरत वादियां और यहां से चलने वाली ठंडी हवाएं यहां से निकलने वाली नदियां देश के एक बड़े हिस्से को जीवन दे रही हैं। उत्तराखंड के खूबसूरत पहाड़ों में रहने वाले लोगों का जीवन किसी पहाड़ से कम नहीं है। उत्तराखंड में कभी कुमाऊं तो कभी गढ़वाल में बनने वाले विद्युत बांधों की वजह से सैकड़ों परिवारों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। टिहरी से लेकर अन्य बांध परियोजनाओं में लाखों लोगों ने विस्थापन का दंश झेला है। एक बार फिर से उत्तराखंड के देहरादून स्थित विकास नगर क्षेत्र के कुछ गांव के लोग अपने पुश्तैनी घरों को छोड़ने के लिए मजबूर हो गए हैं, जिन गांव में वह पैदा हुए, बचपन बीता शादी हुई और हर रिति-रिवाज का वह हिस्सा रहे, आज वह गांव पानी में जलमग्न हो रहा है।

हम बात कर रहे हैं, विकास नगर एक आलसी में बनने जा रहे व्यासी जल विद्युत परियोजना की। इस परियोजना की जद में आए लोहारी गांव के लोग अब पहाड़ी से बैठकर अपने उन घरों को डूबता हुआ देख रहे हैं, जिनमें रहकर उन्होंने पूरा जीवन बिताया है। शहर के लोगों को पानी-बिजली मिल पाए, इसके लिए एक बार फिर से उत्तराखंड के इस क्षेत्र के गांव जल समाधि ले रहे हैं। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि उन गांव वालों के ऊपर क्या बीत रही होगी, जो अपने सामने गांव को झील बनते देख रहे हैं। चेहरे पर बेबसी और आंखों में आंसू लिए ये लोग शायद अपनी नियति को ही कोश रहे होंगे।


71 परिवार रहते हैं गांव में

लोहारी गांव अब इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाएगा। वैसे उत्तराखंड के टिहरी के किस्से भी अब इतिहास के पन्नों में ही हैं। इसी तरह से आज की पीढ़ी इस गांव को जलमग्न होता देख रही है। बेहद खूबसूरत और पहाड़ों के बीच में बसाए गांव किसी स्वर्ग से कम नहीं हैं, लेकिन परियोजना मूल रूप ले सके, इसके लिए इस गांव को डुबोया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि कल शाम (गुरुवार शाम) तक यह गांव पूरा पानी में जलमग्न हो जाएगा। इस गांव में लगभग 71 परिवार रहते थे, जिनको सरकार अब विस्थापन कर रही है। बताया जा रहा है कि इस गांव में रहने वाले 5 लोगों का कोई भी वारिश नहीं है। सरकार की मानें तो सभी लोगों के खातों में पैसा डाल दिया गया है, जबकि सरकार ने जमीन और घर देने का भी इन लोगों को वादा किया है। ग्रामीणों का कहना है कि वह बांध के ऊपर ही आसपास किसी जगह पर बसना चाहते हैं, ताकि उनकी यादें इस पहाड़ी और पहाड़ से जुड़ी रहें।

इतनी है उत्पादन क्षमता
82 बांध परियोजना का जलस्तर 669 मीटर तक पहुंचाने के साथ ही कल सुबह यानी सोमवार को यह पानी खेतों स्कूल पंचायत घर और गांव के घरों तक पहुंचने लगा था। धीरे-धीरे शाम तक जलस्तर बढ़ता गया और घरों की दहलीज को मांगते हुए पानी ऊपर तक चढ़ने लगा है। यह बांध परियोजना 120 मेगावाट की परियोजना है, जिसका स्वामित्व उत्तराखंड ही है।

इस बांध की ऊंचाई 204 मीटर 669 फीट है, जबकि इसकी उत्पादन क्षमता 300 मेगावाट है। इस परियोजना का काम 1987 में शुरू हुआ था, जिसको अब पूरा किया जा रहा है 15 से 16 अप्रैल तक पानी बिजली उत्पादन के स्तर पर पहुंच जाएगा। अप्रैल के अंत तक पावर हाउस से बिजली उत्पादन शुरू हो जाएगा।

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