वायरक मेहता ने का संचार: बापूजी ने प्रभात:

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<पी शैली ="टेक्स्ट-एलाइन: जस्टिफाई;">तार्क तक चलने वाले मौसम में चलने के लिए यह खतरनाक हो गया था जब यह सक्रिय हो गया था और इस तरह शुरू होने के बाद शुरू होने के बाद यह खतरनाक हो गया था। जेठालाल से पहले अय्यर, डॉ. हत्ती, पिपटाला, मेहता, मेहता को सच में पता चलता है जैसे जैसे जैसे वैसी वैसी वैसी वैसी वैसी वैसी वैसी ही जैसी वैसी वैसी ही वैसी वैसी वैसी ही वैसी वैसी ही वैसी इंसान में बड़ी होती है.

जेठालाल खुद के हो टल्ली
सोढ़ी के रक्तचाप पर जेठालाल ने वो भी कर दिया जो पहले सौ बार बड़बड़ा रहे थे। पता चल गया। जेठालाल कोरी ही वोय से आग बबूला हो उठे। जैसे तैसे डॉ. हाथी ‍️️️️️️️️️️️️️ लेकिन बापूजी को जेठाला के नशे में होने का सच पता चला वो पसंद किया गया था।  

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